!! जय भास्कर !!

Wednesday, January 18, 2012

शाकद्वीपीय मघ ब्राह्मिन समाज ( श्री डूंगरगढ़ ): बुद्धि और विवेक का तालमेल न केवल लक्ष्य तक पहुंचना...

शाकद्वीपीय मघ ब्राह्मिन समाज ( श्री डूंगरगढ़ ): बुद्धि और विवेक का तालमेल न केवल लक्ष्य तक पहुंचना...: बुद्धि और विवेक का तालमेल न केवल लक्ष्य तक पहुंचना आसान बनाकर सुख की हर चाहत को पूरी करता है। किंतु मकसद को पूरी करने के लिए अहम है कि ...

Tuesday, January 17, 2012

बुद्धि और विवेक का तालमेल न केवल लक्ष्य तक पहुंचना आसान बनाकर सुख की हर चाहत को पूरी करता है। किंतु मकसद को पूरी करने के लिए अहम है कि उससे जुड़ी संभावित बाधाओं को ध्यान रख पहले से ही तैयारी की जाए। इनके बावजूद भी अनेक अवसरों पर अनजानी-अनचाही मुसीबतों से दो-चार होना पड़ता है।

हिन्दू धर्म में भगवान श्री गणेश ऐसे ही देवता के रूप में पूजनीय है, जिनका नाम जप ही कार्य में आने वाली जानी-अनजानी विघ्र, बाधाओं का नाश कर देता है।

शास्त्रों में गृहस्थी हो या व्यापार या फिर किसी परीक्षा और प्रतियोगिता में सफलता की चाह रखने वालों के लिए श्री गणेश के इस मंत्र जप का महत्व बताया गया है। जिसमें भगवान श्री गणेश के 12 नामों की स्तुति है। जानते हैं यह श्री गणेश मंत्र -

- बुधवार या हर रोज इस मंत्र का सुबह श्री गणेश की सामान्य पूजा के साथ जप बेहतर नतीजे देता है। पूजा में दूर्वा चढ़ाना और मोदक का यथाशक्ति भोग लगाना न भूलें।

गणपर्तिविघ्रराजो लम्बतुण्डो गजानन:।

द्वेमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिप:।

विनायकश्चायकर्ण: पशुपालो भावात्मज:।

द्वाद्वशैतानि नामानि प्रातरूत्थाय य: पठेत्।

विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्रं भवते् कश्चित।

Monday, January 9, 2012

शाकद्वीपीय मघ ब्राह्मिन समाज ( श्री डूंगरगढ़ ): जानिए शिव या किसी भी देव मंत्रों के जप के लिए शास्...

शाकद्वीपीय मघ ब्राह्मिन समाज ( श्री डूंगरगढ़ ): जानिए शिव या किसी भी देव मंत्रों के जप के लिए शास्...: शास्त्रों में अलग-अलग रूपों में शिव या अन्य देवताओं के मंत्र जप हर कामनापूर्ति, गंभीर रोग, पीड़ा और दु:ख से छुटकारे के लिए शुभ व असरदार म...

जानिए शिव या किसी भी देव मंत्रों के जप के लिए शास्त्रों के मुताबिक कौन-सी जगह श्रेष्ठ होती है

शास्त्रों में अलग-अलग रूपों में शिव या अन्य देवताओं के मंत्र जप हर कामनापूर्ति, गंभीर रोग, पीड़ा और दु:ख से छुटकारे के लिए शुभ व असरदार माने गए हैं। किंतु अक्सर यह भी देखा जाता है कि परेशानियों से निजात पाने की व्यग्रता में कोई व्यक्ति मंत्र जप करता है तो अनजाने में गलत स्थान चुनने से मंत्र जप की मर्यादा भंग होती है। जबकि शास्त्रों में मंत्र जप प्रभावी बनाने व शुभ फल पाने के लिए स्थान की पवित्रता का महत्व बताया गया है।

जानिए शिव या किसी भी देव मंत्रों के जप के लिए शास्त्रों के मुताबिक कौन-सी जगह श्रेष्ठ होती है, जहा मंत्र कामनासिद्धि और असरदार होते हैं -

- शिव मंत्र जप ऐसे जगह पर करें जहां ध्यान भंग न हो और मन शांत भी रहे।

- शिव या अन्य देव मंत्र जप समुद्र तट, नदी का किनारा, तीर्थस्थल श्रेष्ठ होता है।

- शिव, विष्णु या देवी के मंदिर में भी मंत्र जप शुभ फल देते हैं।

- गौशाला, बरगद के पेड़, आंवले के पेड़, तुलसी के पौधों के बीच या किसी भी पवित्र स्थान पर जप करना भी प्रभावी माना जाता है।

- बिल्वपत्र, वटवृक्ष या आम के पेड़ के नीचे मंत्र जप सिद्धि देने वाला होता है।

- सुनसान या भय पैदा करने वाले स्थानों, सिनेमाघर, बाजार के समीप या जहां ध्वनि यंत्रों का शोर होता हो, वह पर मंत्र जप न करें।

- यह संभव न हो तो घर के खाली कमरे या कोने में चन्दन अगरबत्ती, गुलाब के फूल से वातावरण सुगंधित और स्वच्छ बनाकर मंत्र जप कर सकते हैं।

- शास्त्रों के मुताबिक सूर्य, अग्रि, गुुरु, चन्द्रमा, दीपक, जल, ब्राह्मण और गायों के सामने जप करना श्रेष्ठ है।

- गौशाला में जप करने से घर में किए जप से दस गुना फल प्राप्त होता है। ध्यान रहे ऐसी गौशाला में बैल न हो।

- जंगल में जप करना, घर में किए जप की तुलना में सौ गुना फलदायी होता है। इसी तरह तालाब के किनारे हजार गुना और समुद्र, नदी किनारे, पहाड़ या शिव मंदिर में जप लाख गुना फल देता है।
-    वहीं गुरु के चरणों मे जप अनन्त गुना फल देता है।

शाकद्वीपीय मघ ब्राह्मिन समाज ( श्री डूंगरगढ़ ): गोमती चक्र

शाकद्वीपीय मघ ब्राह्मिन समाज ( श्री डूंगरगढ़ ): गोमती चक्र: !! जय श्री बाबा भैरव नाथ !! तंत्र शास्त्र के अंतर्गत तांत्रिक क्रियाओं में एक ऐसे पत्थर का उपयोग किया ...

गोमती चक्र



                                 !! जय श्री बाबा भैरव नाथ  !!


तंत्र शास्त्र के अंतर्गत तांत्रिक क्रियाओं में एक ऐसे पत्थर का उपयोग किया जाता है जो दिखने में बहुत ही साधारण होता है लेकिन इसका प्रभाव असाधारण होता है। इस पत्थर को गोमती चक्र कहते हैं। गोमती चक्र कम कीमत वाला एक ऐसा पत्थर है जो गोमती नदी में मिलता है। गोमती चक्र के साधारण तंत्र उपयोग इस प्रकार हैं-

- पेट संबंधी रोग होने पर 10 गोमती चक्र लेकर रात को पानी में डाल दें तथा सुबह उस पानी को पी लें। इससे पेट संबंध के विभिन्न रोग दूर हो जाते हैं।

- धन लाभ के लिए 11 गोमती चक्र अपने पूजा स्थान में रखें। उनके सामने श्री नम: का जप करें। इससे आप जो भी कार्य या व्यवसाय करते हैं उसमें बरकत होगी और आमदनी बढऩे लगेगी।

- गोमती चक्रों को यदि चांदी अथवा किसी अन्य धातु की डिब्बी में सिंदूर तथा चावल डालकर रखें तो ये शीघ्र शुभ फल देते हैं।

- होली, दीवाली तथा नवरात्र आदि प्रमुख त्योहारों पर गोमती चक्र की विशेष पूजा की जाती है। अन्य विभिन्न मुहूर्तों के अवसर पर भी इनकी पूजा लाभदायक मानी जाती है। सर्वसिद्धि योग तथा रविपुष्य योग पर इनकी पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।                                   



                                     !! जय श्री राधे कृष्णा  !!

स्वर्गलोक

माघ मास का प्रारंभ 10 जनवरी, मंगलवार से हो रहा है। हिंदू धर्म में माघ मास को बहुत ही पवित्र माना गया है। मत्स्य पुराण, महाभारत आदि धर्म ग्रंथों में मास मास का महत्व विस्तार से बताया गया है। इस मास में भगवान माधव की पूजा करने तथा नदी स्नान करने से मनुष्य स्वर्गलोक में स्थान पाता है। धर्मग्रंथों के अनुसार-

स्वर्गलोके चिरं वासो येषां मनसि वर्तते।

यत्र क्वापि जले तैस्तु स्नातव्यं मृगभास्करे।।

अर्थात जिन मनुष्यों को चिरकाल तक स्वर्गलोक में रहने की इच्छा हो, उन्हें माघ मास में सूर्य के मकर राशि में स्थित होने पर पवित्र नदी में प्रात:काल स्नान करना चाहिए।

माघं तु नियतो मासमेकभक्तेन य: क्षिपेत्।

श्रीमत्कुले ज्ञातिमध्ये स महत्त्वं प्रपद्यते।।

(महाभारत अनु. 106/5)

अर्थात जो माघमास में नियमपूर्वक एक समय भोजन करता है, वह धनवान कुल में जन्म लेकर अपने कुटुम्बीजनों में महत्व को प्राप्त होता है।

अहोरात्रेण द्वादश्यां माघमासे तु माधवम्।

राजसूयमवाप्रोति कुलं चैव समुद्धरेत्।।

(महाभारत अनु. 109/5)

अर्थात माघ मास की द्वादशी तिथि को दिन-रात उपवास करके भगवान माधव की पूजा करने से उपासक को राजसूययज्ञ का फल प्राप्त होता है और वह अपने कुल का उद्धार कर देता है।